अल्फ़ाज़ इश्क़ के***

1.चलो मैं आज फ़िर आगाज़ करती हूं,

मेरी बेकरारी ,तेरी बेरुखी के नाम करती हूं।💔

2. बड़ी तिशनागी थी तुम्हें हबीब बनाने की,

पर हमें क्या पता था………………..………….….. तुम्हें आदत थी हर किसी को चाहने की।

3. इश्क़ अश्कों से बह ही गया ,

जब तू मेरे हबीब से मेरा रकीब बन गया।

4. खुशनसीब इतना तो नहीं के तू करे इंतज़ार मेरा,

पर बदनसीब इतनी मैं भी नहीं के तू ना करे दीदार मेरा।💓💓💕💕💕

22 Comments

  1. हबीब, रकीब और कातिल इश्क़ का जहर लिए घूमते है । बहुत अच्छा लिखा है । आज होली है तुम्हे ढ़ेरो बधाई ।

    Liked by 2 people

  2. अरे वाह👌
    बड़े दिनो बाद …कैसन है RAS की तैयारी

    जीतीयेगा जरूर दोस्त ☺✨

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s