मेरा वो गाँव 🌹🌹

आज भी मुझे मेरा वो गाँव याद आता है,

वो लहराती फसलें वो सावन के गीत,

वो बंसत के ढोल, वो पानी से पोखर,

सबका सब आज भी याद आती है।

जहाँ आज भी हर बुजुर्ग दादा कहलाता है।

और जहाँ हर किसी से ,

कोई न कोई नाता बन जाता है।

बच्चा आज भी वहाँ,

बाप के कंधों पर मेला देखने जाता है।

और पनघट पर आज भी

पनहारन को देखकर दिल खुश हो जाता है।

मक्के की वो रोटी ओर सरसों का साग,

आज भी घर जल्दी बुलाता है।

आज भी मुझे मेरा वो गाँव याद आता है।

जहाँ हर बच्चा अपने पापा का बचपन और

हर जवान अपने बुढे पिता की जवानी दोहराता है।

ज्यादा आधुनिक सुविधाएं नहीं है मेरे इस गाँव में,

फिर भी भूखा न कोई सोता है,

कम या ज्यादा लेकिन पेट, सभी का भरता है।

क्योंकि यहाँ जिंदादिली इंसान रहता है।

बुजुर्ग भी है, जवान भी है,

और हा बच्चे भी है मेरे उस गाँव में।

ना कोई अनाथालय है ना कोई वृद्धाश्रम है,

मेरे प्यारे से गाँव में****””””।

इसलिए मुझे मेरा वो गाँव याद आता है।

जहाँ आज भी बचपन खुलकर जिया जाता है।

हाँ आ गई हूँ मैं, गाँव की वो गलियां छोड़कर,

हर सुविधा है यहाँ पर, फिर भी खुशी नहीं है,

क्योंकि यहाँ सताने के लिए मेरे गाँव के बुजुर्ग नहीं है।

यहाँ मेरे गाँव सी वो खुशहाली नही है।

आज भी मुझे मेरा वो गाँव याद आता है।

जहाँ लड़की और औरत,

सब की बहन और माता है।

जहाँ घर का बुजुर्ग हक़ से ,

घर में अपना हुकूम चलाता है।

समय बताने वाली कोई घड़ी नहीं है वहाँ,

फिर भी मेरे गाँव में दिन जल्दी हो जाता है।

वो झूले वो घेवर,

ये तीज त्यौहार, मुझे मेरा वो गाँव याद दिलाता है।

27 Comments

  1. अक्सर देखा है…..जब कोई गाँव शहर बन जाता है तो इंसानों कि इंसानियत मर जाती है😳

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