जिंदगी का फलसफा

अमावस की अंधेरी रातो में,

और दिन के उजाले में भी।

आखें मूंद के यू तो ,

लेटे रहते हैं हर दफा।

कभी रो लेते हैं तो कभी,

हसने का बहाना कर लेते हैं।

यू तो बहुत कुछ दिया है जिंदगी ने,

हमेशा सिखाया है जिंदगी का फलसफा।

लेकिन जनाब फिर भी यहाँ,

किसे जिंदगी में, सबकुछ मुनासिफ होता है।

जब -जब भी जिंदगी से,

किसी चीज की गुहार लगाई है।

तब तब हमेशा नाकामी ही,

हिस्से में आयी है।

फंस से गये हैं फर्ज और ख्वाहिशों के बीच,

फर्ज का ध्यान करते ही,

ख्वाहिश दब सी जाती है। 😞😞

और बिन ख्वाहिश जिंदगी वीरान सी लगती है।

हाँ मानती हूँ मुश्किलें जिंदगी में हजार आती है,

एक बार नहीं बार-बार और बेशुमार आती है।

लेकिन फिर भी पूछना था मुझे कि…..

ये हमेशा मेरे हिस्से ही क्यों आती है।

ऐसा नहीं है कि मैं कमजोर हूँ, 😟😟

लेकिन फिर भी साहब हिम्मत है,

जवाब दे ही जाती है।

33 Comments

  1. Wonderful sharing. In life, we have desires to fulfill with which responsibilities are there to be performed and with it all, we sometimes succeed and other times we do not. This goes on with everybody according to our Karmic credit and debt.

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